क्या राकेश झुनझुनवाला ने सच में 5 हजार रूपयों को शेयर मार्केट में निवेश कर के 46 हजार करोड़ रुपए में बदल दिया ?

जी ये काफ़ी हद तक सही है , पर मे आपको कुछ बाते बताता हू आप सोचिएगा इस बारे मे।


(1) राकेश सर 1985 मे चार्टर्ड एकाउंटेंट थे तो ज्ञान की कमी नही थी उनमे, आजकल कोई भी आता है मार्केट मे कुछ पढ़ता नही है कोई ज्ञान नही और पैसे कमाने आ जाते है ।

(2) 1985 मे 5000 रूपये बड़ी रकम होती थी आप अपने परिवार के बडे बुजुर्गों के पास बैठना और पूछना की आपको 1985 मे कितनी तन्ख्वाह मिलती थी। अगर मे गलत नहीं हू तो ये उस समय की एक सरकारी कर्मचारी की एक वर्ष की तन्ख्वाह थी।

(3) उस समय मार्केट 1986 मे मार्केट 561 था जो आज 38000 पॉइंट के आसपास है और अगर मे गलत नही हू तो 1985 मे ये 150–200 पॉइंट था।

(4) हमारी जो बड़ी बड़ी कंपनी है जो आज आज हजारों मे है वो 4 रुपये 5रूपये मे थी और जब कंपनी लिस्ट होती है तो उसकी प्राइस कम ही होती है पर हम कह नही सकते की ये कंपनी कैसे काम करेगी तो रिस्क भी बहुत ज्यादा है।

(5) उस टाईम मार्केट मे इन्वेस्टर्स और ओपरेटर कम थे आज जितना रिस्क नही था बस समझ होनी चाहिए थी। पैसे तो होने चाहिये।

वो समय अलग था आज का अलग है एकदम से ये पढ़कर की 5000 से इतने करोड़ कमाए तो मे 50000 से कर लूंगा देखिये किस्मत, मेहनत का बहुत बड़ा फर्क है अगर सब सही रहा तो ये भी हो सकता है । पर इतना आसान नही ।

मे राकेश सर की तहेदिल से इज्जत करता हूं क्युकी उन्होने उस समय ये व्यवसाय चुना जब सरकारी नौकरी जबरदस्ती मिल जाती थी। फौज मे तो लम्बे आदमियो को आने ही नही देते थे अगर आदमी चला गया तो वापस आने नही देते थे। उनकी बहुत बड़ी मेहनत है 35 साल की मेहनत, बहुत ज्यादा समय है और एक गलती और सब खत्म तो समझदारी से करे।
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